भारत छोड़ो आंदोलन 1942 ई. exam में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल जवाब
क्रिप्स प्रस्तावों की असफलता और जापानी आक्रमण के बढ़ते हुए खतरे तथा युद्धकालीन परिस्थितियों के कारण बढ़ती हुई कीमतों और वस्तुओं के अभाव ने भारतीय जनमानस को असंतोष से भर दिया।
5 जुलाई, 1942 ई. को गांधीजी ने हरिजन में लिखा ‘अंग्रेजों भारत को जापान के लिए मत छोड़ों बल्कि भारत को भारतीयों के लिए व्यवस्थित रूप से छोड़ जाओ।
14 जुलाई, 1942 ई. को वर्धा में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भारत छोड़ो आंदोलन पर एक प्रस्ताव पारित किया गया।
आंदोलन की सार्वजनिक घोषणा से पूर्व 1 अगस्त, 1942 ई. को इलाहाबाद में तिलक दिवस मनाया गया। इस अवसर पर नेहरू ने कहा- ‘हम आग से खेलने जा रहे हैं। हम दुधारी तलवार का प्रयोग करने जा रहे हैं जिसकी चोट उल्टे हमारे ऊपर भी पड़ सकती है’। आगे नेहरू ने कहा कि ‘संघर्ष निरंतर संघर्ष, मेरा यही उत्तर है एमरी और क्रिप्स को ।
7 अगस्त, 1942 ई. को बम्बई के ऐतिहासिक ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की वार्षिक बैठक ( अध्यक्षता मौलाना अबुल कलाम आजाद ने की) हुई। इस बैठक में वर्धा प्रस्ताव (भारत छोड़ो आंदोलन ) की पुष्टि कर दी गयी ।
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष का प्रथम आंदोलन था जिसने नेतृत्वविहीनता की स्थिति में भी अपने उद्देश्य को पूरा किया।
भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रान्ति के नाम से भी जाना जाता है। इसे भारतीय स्वतन्त्रता संघर्ष की अंतिम महान लड़ाई भी माना जाता है।
बम्बई कांग्रेस ने भारत छोड़ो प्रस्ताव को थोड़े बहुत संशोधन के बाद 8 अगस्त, 1942 ई. को पास कर दिया।
इस आंदोलन के दौरान गांधीजी ने करो या मरो (Do or Die) का नारा दिया।
कांग्रेस आंदोलन चला सके, इसके पहले की सरकार ने कड़ा प्रहार करते हुए 9 अगस्त, 1942 ई. को एकदम सुबह गांधीजी तथा दूसरे महत्त्वपूर्ण नेता गिरफ्तार कर लिए गये। साथ ही कांग्रेस को गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया।
गांधीजी को पूना के आगा खाँ महल में तथा कांग्रेस कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों को अहमदनगर के दुर्ग में रखा गया।
1942 ई. के इस आंदोलन का सर्वाधिक प्रभाव बंगाल, बिहार, उत्तरप्रदेश, मद्रास और बम्बई में था लेकिन इसमें समूचे देश की हिस्सेदारी थी ।
भारत छोड़ो आंदोलन के समय बम्बई अहमदाबाद और जमशेदपुर में मजदूरों की हड़तालें लंबी चली ।
जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया एवं अरुणा आसफ अली जैसे नेताओं ने भूमिगत रहकर इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान किया ।
इस आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी से बचे नेता वी. एम. खाकर, राममनोहर लोहिया, उषा मेहता, नादिमान अब्रवाद प्रिंटर आदि ने आंदोलन के समय भूमिगत कांग्रेस रेडियो स्टेशन का संचालन किया।
कांग्रेस रेडियो स्टेशन बम्बई और नासिक में स्थापित थे, उनका मुख्य कार्य कांग्रेस की सूचनाओं का प्रसारण करना होता था। 12 नवंबर, 1942 ई. को कांग्रेस रेडियो स्टेशन सरकार द्वारा जब्त कर लिया गया। आंदोलन के प्रति सरकार की दमनात्मक नीति के विरुद्ध गांधीजी ने आगा खाँ महल में 10 फरवरी, 1943 से 21 दिन का उपवास शुरू कर दिया।
भारत की ब्रिटिश सरकार उन्हें मुक्त न कर उनकी मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगी। सरकार की इस बर्बर नीति के विरोध में वायसराय की कौंसिल के सदस्य सर मोदी, सर ए. एन. सरकार एवं अणे ने इस्तीफा दे दिया।
खराब स्वास्थ्य के कारण 9 मई, 1944 ई. को गांधीजी को जेल से छोड़ दिया गया। गांधीजी के रिहा होने से पूर्व ही उनकी पत्नी कस्तूरबा और उनके निजी सविच महादेव देसाई की मृत्यु हो गयी।
भारत छोड़ो आंदोलन के समय देश के कई इलाकों में ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया और समानांतर सरकारें स्थापित की गयी।
बलिया (उत्तरप्रदेश) में गांधीवादी चित्तू पाण्डे के नेतृत्व में पहली समानांतर सरकार स्थापित हुई। को तामलुक बंगाल के मिदनापुर जिले के तामलुक नामक स्थान पर 17 दिसंबर, 1942 जातीय सरकार (समानांतर सरकार) की स्थापना की गयी । यहाँ की सरकार ने एक सशस्त्र विद्युत वाहिनी का गठन किया। यहाँ की सरकार 1 सितंबर, 1944 ई. तक चली।
सतारा (महाराष्ट्र) में इस समय की सर्वाधिक दीर्घजीवी समानांतर सरकार की स्थापना हुई, यहाँ की सरकार 1945 ई. तक चली। सतारा के समानांतर सरकार के नेताओं में वाई.पी. चव्हाण, नाना पाटिल प्रमुख थे। सतारा के समानांतर सरकार, जिसे प्रति सरकार के नाम भी जाना जाता है, द्वारा गांधी विवाहों का आयोजन किया गया।
भारत छोड़ो आंदोलन में मुसलमानों का योगदान संदेहास्पद था, फिर भी मुस्लिम लीग के कुछ सदस्यों ने भूमिगत नेताओं को अपने घर में पनाह दी।
वामपंथियों या साम्यवादियों ने इस आंदोलन का इसलिए विरोध किया क्योंकि वे द्वितीय महायुद्ध में ब्रिटेन के साथ तथा साम्राज्यवादी ताकतों के विरुद्ध थे।
Pahle ka jo topic dala hai uska quiz bhi daliye sahi answer ke sath kuch kuch me mistake hai answer me