छत्तीसगढ़ की जनजातीय गीत सामान्य ज्ञान | Chhattisgarh Janjatiya Geet GK

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On: June 13, 2026
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छत्तीसगढ़ जनजातीय गीत कुछ इस प्रकार है

  1. फसल वाले गीत- छेरता गीत, तारा गीत, करमा गीत
  2. विवाह गीत – रीलोगीत, कोटनी गीत
  3. मृत्यु गीत – घोटुल पाटा
  4. अन्य गीत – चइत परव गीत, लेजागीत, धनकुल / जगारगीत, लिंगोपेन गीत, गौरा गौरी गीत

फसल वाले गीत

1. छेरता गीत-

  • छेरतागीत अन्नदान का महापर्व छेराछेरा के अवसर पर गाया जाता है।
  • नई फसल का खलिहान से घर आने की खुशी में बस्तर अंचल में प्रतिवर्ष पौष पूर्णिमा के दिन छेरछेरा उत्सव के अवसर पर बालक- बालिकाओं द्वारा हल्बी एवं भतरी बोली में यह गीत गाया जाता है।
  • इस दिन सुबह से ही बच्चे, युवक व युवतियाँ घर-घर जाकर छेरछेरा (अन्न का दान) मांगते हुए “छेरछेरा, कोठी के धान ला हेरहेरा” गीत गाते हैं। ·

2. तारा गीत

  • नई फसल आने की खुशी में यह गीत नवयुवतियों द्वारा हल्बी व भतरी में गाया जाता है।
  • तारागीत पौष की रात्रि में समूह में गाया जाता है तथा अन्त में नवयुवतियाँ पिकनिक मनाती हैं।

3. करमा गीत

  • किवंदती के अनुसार कर्मसेनी वृक्ष की शाखा का देवता के रूप में स्थापना करके उसका पूजन किया जाता है तथा विजयादशमी से लेकर वर्षा ऋतु के आगमन तक करमा गीत गाया जाता है और इसके साथ ही करमा नृत्य किया जाता है। · विवाह गीत
  • यह मनोजन गीत है तथा किसी भी स्थिति पर यह गीत रचा जाता है, इसके भाव बड़े सुंदर होते हैं तथा पाल का नाम न लेकर उसे किसी अन्य शब्द (प्यार भरा संबोधन) से संबोधित किया जाता है। जैसे- गोलेंदा जोड़ा, जवारा, भोजली आदि ।
  • करमा गीत गाते समय मांदर बजाया जाता है, इसके आयोजन स्थल को ” अंखरा” कहा जाता है।

4. रीलो गीत

  • रीलो गीत हल्बी में मुरिया एवं माड़िया जनजातियों द्वारा विवाह के अवसर पर गाया जाता है।
  • गायक नृत्य की मुद्रा में रहते हैं तथा मांदरी वाद्य बजाकर गीत गाते

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